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मेडिकल कालेज में लेप्रोस्कोपिक तकनीक से जन्मजात बीमारी से बालक ने निजात पाया

वेब वार्ता (न्यूज़ एजेंसी)/ अजय कुमार वर्मा
लखनऊ ३ फ़रवरी। विगत दिवस मेडिकल कालेज के बल शल्य चिकित्सा विभाग के डाक्टरों ने 7 साल के बालक को उसकी जन्मजात बीमारी से बिना चीरा या ऑपरेशन के निजात दिलाया।
   उल्लेखनीय है कि बाराबंकी निवासी आसाराम अपने 7 साल के बेटे अंग्रेजों के जन्म से पेट दर्द और उल्टी से परेशान था। वह प्रोफेसर एवं हेड डॉक्टर जी डी रावत बाल शल्य चिकित्सा विभाग किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय लखनऊ की ओपीडी में आए जांच के बाद पता चला कि मरीज कोलेडोकल सिस्ट नामक बीमारी से ग्रस्त था, जो कि एक जन्मजात विकृति है, जिसमें पित्त की नली विकृत हो जाती है और 1 ट्यूब के बजाय थैली बन जाती है। आमतौर पर इस रोग का ऑपरेशन पेट में एक चाहिए लगाकर किया जाता है। लेकिन प्रोफेसर जीडी रावत एवं टीम ने लेप्रोस्कोपिक तकनीक से सर्जरी करने की योजना बनाई, 25 जनवरी को मरीज का ऑपरेशन कर दिया जाता है। जो कि लगभग 5 घंटे चला लेप्रोस्कोपी उपकरणों को लगाने के लिए पेट में बड़ा चीरा लगाने के बजाय चार छोटे छेद किए गए, पोस्ट ऑपरेटिव अवधि में रोगी को ओपन सर्जरी की तुलना में कम दर्द हुआ परेशानी होती है। रोगी को 6 दिनों के बाद छुट्टी दे दी गई। ऑपरेटिव टीम के अन्य सदस्य डॉ सुधीर सिंह, डॉ पीयूष कुमार त्यागी एवं डॉ जे0पी0 सिंह, डॉ सतीश वर्मा और नर्सिंग स्टाफ में सिस्टर वंदना, सिस्टर अंजू और संजय सहित उनकी रेजिडेंट्स द्वारा इतनी लंबी सर्जरी के लिए इनका सहयोग रहा।

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